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18 Dec, 2017(Hindi)
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ऑस्ट्रेलिया में ४ हजार से अधिक संस्थानों पर यौन शोषण का आरोप, कैथोलिक संस्थान सबसे आगे

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December 15, 2017
एक र्इसार्इ देश होने के नाते आॅस्ट्रेलिया के लिए यह एक गंभीर समस्या है ! आज भारत में भी चर्च की आड़ में यौन शोषण के हजारों मामले सामने आ रहे हैं। इससे जनता के मन में क्या चर्च सेक्स स्कैंडल का अड्डा बन गया है?, एेसा प्रश्न आ सकता है ! – सम्पादक,
सिडनी : ऑस्ट्रेलिया में पांच साल तक चली एक जांच की अंतिम रिपोर्ट में कहा गया है कि, देश के संस्थान दशकों से बच्चों की देखभाल करने में नाकाम रहे हैं और हजारों बच्चे यौन शोषण का शिकार हुए हैं। जांच रिपोर्ट में इसे राष्ट्रीय त्रासदी बताया गया है। चर्च, अनाथालय, खेल क्लब, युवा समूह और विद्यालयो में यौन शोषण का शिकार हुए १५००० से ज्यादा बच्चों ने जांच आयोग से संपर्क किया।
बच्चों ने आयोग को अपनी दर्दनाक दास्तां बताई। कुल मिलाकर ४००० से अधिक संस्थानों पर यौन शोषण का आरोप लगा जिनमें से ज्यादातर कैथोलिक संस्थान थे। अंतिम रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया के कई संस्थानों में हजारों बच्चों का यौन शोषण किया गया। हमें कभी सही संख्या का पता नहीं चलेगा। जो भी संख्या हो लेकिन यह एक राष्ट्रीय त्रासदी है।
गौरतलब है कि, ऑस्ट्रेलिया के गिरजाघरों (चर्च) में बाल यौन शोषण संबंधी एक जांच के जो आकंड़े सामने आए हैं वह चौंकाने वाले हैं और उनका बचाव नहीं किया जा सकता। इनसे पता चलता है कि वर्ष १९५० से २०१० के बीच ७% कैथोलिक पादरियों पर बाल शोषण के आरोप लगे थे किंतु इनकी कभी जांच नहीं की गई।
‘द रॉयल कमीशन इंटू इंस्टिट्यूशनल रेस्पोन्सेस टू चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज’ को पता चला कि गिरजाघर प्राधिकारियों के पास बाल यौन शोषण के कथित ४४४४ मामलों की शिकायत की गई जिनमें से १५% से अधिक मामलों में आरोप पादरियों पर लगे। ऑस्ट्रेलिया ने देशभर में बाल यौन शोषण मामलों की जांच के लिए बढ़ते दबाव के मद्देजनर करीब एक दशक बाद वर्ष २०१२ में ‘द रॉयल कमीशन’ को जांच के आदेश दिए। चार साल की सुनवाई के बाद जांच अब अपने अंतिम चरण में है।
सिडनी में चल रही जांच में पूछताछ की अगुवाई कर रही वकील गेल फर्नेस ने कहा, ‘वर्ष १९५० से २०१० के बीच के मामलों में कुल ७% पादरी कथित आरोपी थे। ’ उन्होंने कहा, ‘आंकड़े निराशाजनक हैं। बच्चों को नजरअंदाज किया गया और उससे भी बुरा यह की उन्हें दंडित भी किया गया। आरोपों की जांच नहीं की गई। ’

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