NKS

Yatharth Sandesh
06 Mar, 2026 (Hindi)
Prime News

गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की उठी मांग

Sub Category: Bhakti Geet

/
0 Reviews
Write a Review

8 Views

 

घोड़ी में होली मिलन सत्संग: पत्रकारिता की एकजुटता और गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की उठी मांग
पलवल जिले के गांव घोड़ी स्थित श्री परमहंस आश्रम घोड़ी में होली मिलन सत्संग एवं सामूहिक भोज का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संतजन, समाजसेवी, मीडिया प्रतिनिधि, मातृशक्ति, युवा साथियों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। आयोजन का नेतृत्व मीडिया वेल बीइंग एसोसिएशन के जिला प्रधान गुरुदत्त गर्ग ने किया।
अपने संबोधन में गुरुदत्त गर्ग ने कहा कि यह अवसर केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि लोकतंत्र एक मजबूत भवन है तो पत्रकारिता उसकी नींव है, जो सत्य, पारदर्शिता और जवाबदेही को संभाले रखती है। पत्रकार समाज की आंख, कान और उसकी अंतरात्मा होते हैं।
उन्होंने वर्तमान समय में पत्रकारों के सामने आ रही चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आर्थिक असुरक्षा, संस्थागत दबाव और सत्य के प्रति प्रतिबद्धता के कारण कई बार पत्रकारों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। हालांकि कुछ लोगों के आचरण से पूरी मीडिया बिरादरी को कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। आज भी अधिकांश पत्रकार सीमित संसाधनों में निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट रहने का आह्वान किया।
इस अवसर पर आश्रम के बाल ब्रह्मचारी संत आशुतोषानंद जी महाराज ने अपने प्रवचनों में श्रीमद्भगवद्गीता को भारत का राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि गीता मानव धर्मशास्त्र है और संपूर्ण मानवता को एक सूत्र में बांधने का संदेश देती है। गीता में कर्म, योग और साधना के माध्यम से आत्मकल्याण तथा विश्वशांति का मार्ग बताया गया है।
उन्होंने कहा कि गीता के राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित होने से मानव-मानव के बीच बढ़ रही दूरियां समाप्त होंगी और सामाजिक समरसता को बल मिलेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक निर्णय में संविधान के अनुच्छेद 51(ए) के तहत गीता में वर्णित धर्म का पालन नागरिक कर्तव्य बताया गया है।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने सामूहिक भोज में भाग लिया। आयोजकों ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं, पत्रकार साथियों और समाजसेवियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम आध्यात्मिक ऊर्जा, सामाजिक एकता और सकारात्मक संदेश के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य रूप से कर्मबीर देशवाल बाबूजी, घोड़ी, संजीव तायल,सुनील पोसवाल,डोरी लाल गोला, महावीर सिंह, रतन सिंह,डॉ राजेश मंगला, जयपाल सरपंच,इमरत भगत जी, राजेन्द्र बाबु जी, सरदार डॉक्टर, चंद्रपाल, विष्णुदत्त शर्मा, जयपाल, खुशेन्द्र ,रविन्द्र कुमार आदि विशेष रूप से मौजूद रहे।

Write a Review