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Yatharth Sandesh
25 Jun, 2017 (Hindi)
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‘मां और भगवान का विकल्प आैर देश की पवित्र संपदा है गाय‘ – न्यायाधीश बी.शिव शंकर राव, हैदराबाद उच्च न्यायालय
Sub Category: Bhakti Geet
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हैदराबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बी शिव शंकर राव ने शुक्रवार (१० जून) को कहा कि, गाय देश की पवित्र संपदा है। उन्होंने गाय को मां और भगवान का ‘विकल्प’ बताया ! शिवशंकर ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि, बकरीद के मौके पर मुस्लिम धर्म के लोगों को सेहतमंद गाय को काटने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। न्यायाधीश ने उन डॉक्टरों को आंध्रप्रदेश गौहत्या एक्ट १९७७ के अंतर्गत लाने की मांग भी की जो कि धोखे से सेहतमंद गाय को अनफिट करार देकर सर्टिफिकेट देकर कह देते हैं कि, वे दूध नहीं दे सकती। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उन गायों को काटने की अनुमति है जो कि बूढ़ी हो गई हैं और दूध नहीं दरअसल रामावथ हनुमा नाम के एक व्यक्ति की ६३ गाय और दो बैल जब्त किए गए थे। जिनको छुड़ाने की याचिका लेकर वह उच्च न्यायालय पहुंचा था। वहां शिवशंकर ने हनुमा की दलील यह कहकर ठुकरा दी कि, वह निचली न्यायालय के निर्णय में दखल नहीं देना चाहते। उच्च न्यायालय आने से पहले वह निचली न्यायालय भी गया था परंतु वहां उसकी याचिका ठुकरा दी गई थी।
हनुमा पर आरोप है कि, वह अपने कुछ साथियों के साथ पास के किसानों से उनके गायों और बैलों को लेकर आया था ताकि बकरीद पर उनको काट सके। वहीं अपनी सफाई में हनुमा ने कहा कि, वह उन पशुओं को वहां चराने के लिए लाया था शिवशंकर ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि, जिस व्यक्ति पर गायों को हत्या के लिए लेकर जाने का आरोप हो क्या उस व्यक्ति के पास उनको लेकर जाने का अधिकार है ? यह सवाल पूछा जाना चाहिए और गाय के राष्ट्रीय महत्व जो कि, मां और भगवान का विकल्प हैं उसके लिए इसका जवाब मिलना चाहिए।
न्यायाधीश ने बाबर का उदाहरण देते हुए कहा कि, उन्होंने गौहत्या पर पाबंदी लगाई थी। न्यायाधीश ने कहा कि, बाबर ने अपने बेटे हूमायूं को भी ऐसा ही करने को कहा था। न्यायाधीश ने कहा कि अकबर, जहांगीर और अहमद शाह ने भी गौहत्या पर पाबंदी रखी थी।
न्यायाधीश ने जानवर के साथ होनेवाली क्रूरता को रोकनेवाले अधिनियम, १९६० के सेक्शन ११ और २६ में बदलाव की भी बात कही। उन्होने कहा कि, उसके तहत सजा को बढ़ाकर पांच साल कर देना चाहिए।
स्त्रोत : जनसत्तादेतीं।
हनुमा पर आरोप है कि, वह अपने कुछ साथियों के साथ पास के किसानों से उनके गायों और बैलों को लेकर आया था ताकि बकरीद पर उनको काट सके। वहीं अपनी सफाई में हनुमा ने कहा कि, वह उन पशुओं को वहां चराने के लिए लाया था शिवशंकर ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि, जिस व्यक्ति पर गायों को हत्या के लिए लेकर जाने का आरोप हो क्या उस व्यक्ति के पास उनको लेकर जाने का अधिकार है ? यह सवाल पूछा जाना चाहिए और गाय के राष्ट्रीय महत्व जो कि, मां और भगवान का विकल्प हैं उसके लिए इसका जवाब मिलना चाहिए।
न्यायाधीश ने बाबर का उदाहरण देते हुए कहा कि, उन्होंने गौहत्या पर पाबंदी लगाई थी। न्यायाधीश ने कहा कि, बाबर ने अपने बेटे हूमायूं को भी ऐसा ही करने को कहा था। न्यायाधीश ने कहा कि अकबर, जहांगीर और अहमद शाह ने भी गौहत्या पर पाबंदी रखी थी।
न्यायाधीश ने जानवर के साथ होनेवाली क्रूरता को रोकनेवाले अधिनियम, १९६० के सेक्शन ११ और २६ में बदलाव की भी बात कही। उन्होने कहा कि, उसके तहत सजा को बढ़ाकर पांच साल कर देना चाहिए।
स्त्रोत : जनसत्तादेतीं।
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