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Yatharth Sandesh
28 Jun, 2017 (Hindi)
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वकील कपिल सिब्बल ने तीन तलाक की तुलना ‘अयोध्या में हुए भगवान श्रीरामजी के जन्म’ से की !
Sub Category: Bhakti Geet
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नई देहली : तीन तलाक पर सर्वोच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई के दौरान आॅल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने तीन तलाक की तुलना राम के अयोध्या में जन्म से की है।
कपिल ने कहा कि, तीन तलाक आस्था से जुड़ा विषय है, ठीक उसी तरह जैसे कि मान लीजिए यदि मेरी आस्था राम में है तो मेरा मानना है कि, राम अयोध्या में जन्मे थे। ये आस्था से जुड़ा मामला है। उस पर प्रश्न नहीं तो तीन तलाक पर क्यों। इसलिए इस मामले में न्यायालय को दखल नहीं देना चाहिए।
कपिल सिब्बल ने सुनवाई के दौरान कहा – तीन तलाक १४०० साल पुरानी प्रथा है और यह स्वीकार की गई है। यह मामला आस्था से जुडा है, जो १४०० साल से चल रहा है तो ये गैर-इस्लामिक कैसे है।
यही नहीं तीन तलाक की तुलना कपिल सिब्बल ने हिन्दुओं से की। उन्होंने कहा कि संविधान सभी धर्मों के पर्सनल लॉ को पहचान देता है। हिंदुओं में दहेज के खिलाफ दहेज उन्मूलन कानून लेकर आए, किंतु प्रथा के तौर पर दहेज लिया जा सकता है। इस तरह हिंदुओं में इस प्रथा को संरक्षण दिया गया है तो वहीं मुस्लिम के मामले में इसे अंसवैधानिक करार दिया जा रहा है। न्यायालय को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए नहीं तो सवाल उठेगा कि इस मामले को क्यों सुना जा रहा है? क्यों संज्ञान लिया गया।
स्त्रोत : इण्डिया टीव्ही
कपिल ने कहा कि, तीन तलाक आस्था से जुड़ा विषय है, ठीक उसी तरह जैसे कि मान लीजिए यदि मेरी आस्था राम में है तो मेरा मानना है कि, राम अयोध्या में जन्मे थे। ये आस्था से जुड़ा मामला है। उस पर प्रश्न नहीं तो तीन तलाक पर क्यों। इसलिए इस मामले में न्यायालय को दखल नहीं देना चाहिए।
कपिल सिब्बल ने सुनवाई के दौरान कहा – तीन तलाक १४०० साल पुरानी प्रथा है और यह स्वीकार की गई है। यह मामला आस्था से जुडा है, जो १४०० साल से चल रहा है तो ये गैर-इस्लामिक कैसे है।
यही नहीं तीन तलाक की तुलना कपिल सिब्बल ने हिन्दुओं से की। उन्होंने कहा कि संविधान सभी धर्मों के पर्सनल लॉ को पहचान देता है। हिंदुओं में दहेज के खिलाफ दहेज उन्मूलन कानून लेकर आए, किंतु प्रथा के तौर पर दहेज लिया जा सकता है। इस तरह हिंदुओं में इस प्रथा को संरक्षण दिया गया है तो वहीं मुस्लिम के मामले में इसे अंसवैधानिक करार दिया जा रहा है। न्यायालय को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए नहीं तो सवाल उठेगा कि इस मामले को क्यों सुना जा रहा है? क्यों संज्ञान लिया गया।
स्त्रोत : इण्डिया टीव्ही
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