गोवा के डिचोली में सेक्युलरों की रोहिंग्या मुसलमानों के लिए रैली, परंतु कश्मीरी हिन्दुआें पर चुप्पी ?
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डिचोली : म्यानमार के रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या का निषेध करते हुए यह हत्याकांड तुरंत रोकें एेसी मांग यहां के मुसलमान एवं स्थानिक नागरिकों ने ‘शांतता फेरी’ निकालकर की । इस फेरी में स्थानिक नेता राजेश पाटणेकर, नगरसेवक निसार शेख, अजित बिर्जे, नरेश कडकडे, कॅजिटन वाझ आदी का प्रमुख सहभाग था ।
इस अवसर पर नेता पाटणेकर ने कहा कि, ‘भारत शांतिप्रिय देश है । यहा सभी नागरिक शांतता से रहते है । सर्वधर्मसमभाव मानने वाले इस देश को हिंसा मान्य नही है । म्यानमार का हत्याकांड निषेधार्ह है । तो निसार शेख ने कहा, यह घटना मानवता को कालीख पोतनेवाली है ।
रोहिंग्याआें के लिए रोनेवाले इन लोगों ने कभी केरल में रा.स्व.संघ के कार्यकर्ताआेंकी हो रही हत्या अथवा बांगलादेश में हिन्दुआेंका हो रहा नरसंहार रोकने हेतु कभी एेसा शांतता मोर्चा निकाला है ? म्यानमार में आतंकवादी कारवार्इ करनेवाले रोहिंग्या मुसलमानों के प्रति इतनी हमदर्दी दिखानेवालों को कश्मीरी हिन्दुआेंका कश्मीर में पुनर्वसन होना चाहिए, एेसा कभी नही लगा ।
भारत में अवैध रूप से लगभग ४० हजार रोहिंग्या रह रहे है । म्यांमार सरकार ने भी रोहिंग्या मुसलमाआें को ‘इस्लामिक आतंक’ का चेहरा बताया है ।
नवभारत टाइम्स में छपे समाचार के अनुसार भारत सरकार ने भी इन रोहिंग्या शरणार्थीयों को वापस भेजने का निर्णय लिया है । इसके कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार है :
१. इन शरणार्थियों के आतंकी संगठनों से संबंध है !
२. रोहिंग्या शरणार्थी न केवल भारतीय नागरिकों के अधिकार पर अतिक्रमण कर रहे हैं अपितु सुरक्षा के लिए भी चुनौती हैं !
३. रोहिंग्या शरणार्थियों के कारण सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं !
४. इसके पीछे की एक सोच यह भी है कि, भारत के जनसांख्यिकीय स्वरूप सुरक्षित रखा जाए !
एेसा सब होते हुए भी इन लोगो में रोहिंग्याआें के प्रति हमदर्दी होना, यह आतंक का समर्थन करने के बराबर ही है ।